I. पैसिव कंपोनेंट्स (Passive Components)
ये ऊर्जा उत्पन्न नहीं करते, बल्कि उसे नियंत्रित या स्टोर करते हैं।
Resistor (प्रतिरोधक):
Working: यह इलेक्ट्रॉन के प्रवाह में बाधा (Friction) डालता है। यह विद्युत ऊर्जा को गर्मी (Heat) में बदल देता है।
Example: अगर आपके पास 9V की बैटरी है और 2V की LED, तो बीच में रेजिस्टर वोल्टेज को कम करके LED को फटने से बचाता है।
Capacitor (संधारित्र):
Working: इसमें दो प्लेट्स के बीच एक इंसुलेटर (Dielectric) होता है। यह वोल्टेज के बदलाव का विरोध करता है।
Example: इनवर्टर या बिजली कटने पर पंखा कुछ सेकंड घूमता रहता है, वह कैपेसिटर की जमा ऊर्जा के कारण होता है।
Inductor (इंडक्टर):
Working: जब तार की कुंडली से करंट बहता है, तो चुंबकीय क्षेत्र बनता है। यह करंट में अचानक बदलाव का विरोध करता है।
Example: मोबाइल चार्जर के अंदर छोटे इंडक्टर 'Noise' को साफ़ करने के लिए लगे होते हैं।
Potentiometer (Variable Resistor):
Working: इसमें एक स्लाइडिंग कांटेक्ट होता है जिसे घुमाने पर रेजिस्टेंस की लंबाई बदल जाती है, जिससे वोल्टेज कम-ज्यादा होता है।
Example: रेडियो का वॉल्यूम बटन या पुराने पंखों के गोल रेगुलेटर।
Transformer (ट्रांसफार्मर):
Working: यह Mutual Induction के सिद्धांत पर काम करता है। यह बिना फ्रीक्वेंसी बदले वोल्टेज को स्टेप-अप या स्टेप-डाउन करता है।
Example: खंभे पर लगा ट्रांसफार्मर 11,000V को 230V में बदलता है।
II. सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स (Semiconductors)
इन्हीं के कारण मॉडर्न गैजेट्स (Smartphones, Laptops) संभव हुए हैं।
P-N Junction Diode:
Working: यह एक तरफ से करंट जाने देता है (Forward Bias) और दूसरी तरफ से रोकता है (Reverse Bias)।
Example: बैटरी चार्जर में, ताकि बैटरी का करंट वापस सॉकेट में न जाए।
Zener Diode:
Working: यह रिवर्स दिशा में एक फिक्स वोल्टेज (Zener Voltage) के बाद ही करंट जाने देता है।
Example: वोल्टेज स्टेबलाइजर में आउटपुट को फिक्स रखने के लिए।
LED (Light Emitting Diode):
Working: जब इलेक्ट्रॉन P-N जंक्शन को पार करते हैं, तो वे फोटोन (रोशनी) के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं।
Example: आपके घर के LED बल्ब और टीवी की बैकलाइट।
Bipolar Junction Transistor (BJT):
Working: यह 'Current Controlled' डिवाइस है। बेस (Base) पर छोटा करंट देकर कलेक्टर से एमीटर तक बड़े करंट को कंट्रोल किया जाता है।
Example: किसी भी ऑडियो एम्प्लीफायर में आवाज़ बढ़ाने के लिए।
MOSFET:
Working: यह 'Voltage Controlled' डिवाइस है। यह बहुत ही कम बिजली की खपत करता है और बहुत तेजी से स्विचिंग कर सकता है।
Example: लैपटॉप के प्रोसेसर के अंदर लाखों MOSFET स्विच की तरह काम करते हैं।
IGBT (Insulated Gate Bipolar Transistor):
Working: यह BJT और MOSFET का मिश्रण है। इसमें MOSFET जैसा कंट्रोल और BJT जैसी हाई पावर क्षमता होती है।
Example: इलेक्ट्रिक ट्रेनों (Locomotive) और इंडक्शन चूल्हे में।
SCR (Silicon Controlled Rectifier):
Working: यह एक 'Latching' डिवाइस है। इसे एक बार ट्रिगर करने पर यह तब तक चालू रहता है जब तक करंट बंद न कर दिया जाए।
Example: बड़ी मशीनों के मोटर कंट्रोलर में।
TRIAC:
Working: यह दो SCR के समान है जो दोनों दिशाओं में AC करंट को कंट्रोल कर सकता है।
Example: घर के डिजिटल फैन रेगुलेटर और लाइट डिमर में।
DIAC:
Working: यह एक निश्चित वोल्टेज (Breakover voltage) पहुँचने पर ही दोनों दिशाओं में करंट जाने देता है।
Example: TRIAC को फायर (Trigger) करने के लिए उपयोग किया जाता है।
Schottky Diode:
Working: इसमें साधारण डायोड की तुलना में बहुत कम वोल्टेज ड्रॉप ($0.15V - 0.45V$) होता है और यह बहुत तेज काम करता है।
Example: सोलर पैनल के सर्किट में और हाई-फ्रीक्वेंसी स्विचिंग में।
Integrated Circuit (IC):
Working: एक ही सिलिकॉन चिप पर रेजिस्टर, ट्रांजिस्टर और कैपेसिटर को माइक्रो लेवल पर फिट किया जाता है।
Example: 555 Timer IC जो टाइमिंग और पल्स बनाने के काम आती है।
III. स्विचिंग और प्रोटेक्शन (Protection & Switches)
Relay:
Working: यह इलेक्ट्रोमैग्नेट के सिद्धांत पर काम करता है। छोटे DC सिग्नल से आप 220V AC की लाइट जला सकते हैं।
Example: फ्रिज के स्टेबलाइजर में जब वोल्टेज बढ़ता है, तो 'कट' की आवाज़ आती है, वह रिले ही है।
Optocoupler:
Working: इसके अंदर एक LED और एक फोटो-ट्रांजिस्टर होता है। यह बिजली के संकेतों को रोशनी के जरिए दूसरे सर्किट में भेजता है ताकि हाई वोल्टेज से बचाव हो।
Example: कंप्यूटर की पावर सप्लाई (SMPS) में।
Fuse:
Working: यह कम गलनांक (Melting point) वाली धातु का तार होता है। ज्यादा करंट आने पर गर्मी से पिघल जाता है।
Example: बिजली के बोर्ड या कार के डैशबोर्ड के नीचे सुरक्षा के लिए।
MCB (Miniature Circuit Breaker):
Working: यह थर्मल या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिद्धांत पर काम करता है। यह फ्यूज की तरह जलता नहीं, बस नीचे गिर जाता है।
Example: मॉडर्न हाउस वायरिंग में।
Push Button (Momentary Switch):
Working: यह स्प्रिंग पर काम करता है। दबाने पर संपर्क जुड़ता है, छोड़ने पर टूट जाता है।
Example: कैलकुलेटर के बटन या लिफ्ट के बटन।
Varistor (MOV):
Working: हाई वोल्टेज आने पर इसका रेजिस्टेंस अचानक गिर जाता है और यह एक्स्ट्रा बिजली को ग्राउंड कर देता है।
Example: बिजली के कड़कने पर टीवी या कंप्यूटर को जलने से बचाने के लिए।
IV. सेंसर्स और आउटपुट (Sensors & Output)
LDR (Light Dependent Resistor):
Working: फोटो-कंडक्टिविटी के सिद्धांत पर काम करता है। रोशनी बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन बढ़ते हैं और रेजिस्टेंस कम हो जाता है।
Example: ऑटोमैटिक जलने वाली स्ट्रीट लाइट्स।
Thermistor (NTC/PTC):
Working: गर्मी महसूस करने वाला रेजिस्टर। NTC में गर्मी बढ़ने पर रेजिस्टेंस कम होता है।
Example: मोबाइल बैटरी ज्यादा गरम होने पर फोन बंद होना (Thermal Protection)।
PIR Sensor:
Working: यह इंसानों या जानवरों से निकलने वाली इंफ्रारेड रेडिएशन (गर्मी) को पकड़ता है।
Example: चोरी रोकने वाले अलार्म (Burglar Alarm)।
Ultrasonic Sensor:
Working: यह अल्ट्रासोनिक तरंगें छोड़ता है और उनके टकराकर वापस आने के समय को नापता है ($Speed = Distance/Time$)।
Example: बिना ड्राइवर वाली कारों में और ड्रोन में।
Crystal Oscillator:
Working: यह Piezoelectric Effect पर काम करता है। यह सर्किट को एक फिक्स फ्रीक्वेंसी देता है।
Example: कलाई घड़ी और कंप्यूटर की क्लॉक स्पीड के लिए।
Buzzer (Piezoelectric):
Working: वोल्टेज मिलने पर इसके अंदर की क्रिस्टल प्लेट कंपन करती है, जिससे आवाज़ निकलती है।
Example: कार के रिवर्स गियर की आवाज़।
7-Segment Display:
Working: इसमें 8 LED एक पैटर्न में सजी होती हैं (A to G और एक बिंदी)।
Example: डिजिटल वॉच या पेट्रोल पंप का मीटर।
LCD (Liquid Crystal Display):
Working: लिक्विड क्रिस्टल लाइट को पोलराइज़ करके अक्षर या इमेज दिखाते हैं।
Example: डिजिटल मल्टीमीटर की स्क्रीन।
V. अन्य महत्वपूर्ण भाग (Miscellaneous)
Microphone (Condenser):
Working: आवाज़ की लहरें एक डायफ्राम को हिलाती हैं, जिससे कैपेसिटेंस बदलता है और बिजली का सिग्नल बनता है।
Example: मोबाइल फोन का माइक।
Solenoid Coil:
Working: जब इसमें करंट जाता है, तो यह लोहे की प्लंजर को अंदर खींचती है (Magnetism)।
Example: वाशिंग मशीन के पानी के वाल्व को खोलने/बंद करने के लिए।
Heat Sink:
Working: यह ऊष्मा चालकता (Thermal Conductivity) के जरिए कंपोनेंट की गर्मी हवा में फैला देता है।
Example: कंप्यूटर प्रोसेसर के ऊपर लगा एल्युमीनियम का ढांचा।
Voltage Regulator (78XX Series):
Working: यह एक्स्ट्रा वोल्टेज को गर्मी में बदलकर आउटपुट को एकदम स्थिर (जैसे 5V) कर देता है।
Example: मोबाइल चार्जर के सर्किट बोर्ड में।
Battery (Li-ion/Lead Acid):
Working: केमिकल रिएक्शन के जरिए इलेक्ट्रॉन का फ्लो बनाती है।
Example: मोबाइल और इनवर्टर बैटरी।

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