Skip to main content

Drone क्या होता है | ड्रोन कैसे काम करता है?

 Drone क्या होता है | ड्रोन कैसे काम करता है? 

  

दोस्तों आप  से बहुतो ने ड्रोन को देखा होगा  पर क्या कभी अपने सोचा है ये काम कैसे करता है देखने में तो ये काफी साधारण सा लगता है लेकिन इसके पीछे की technology काफी complex है अगर आप drone के working principle को अच्छी तरह समझ लेंगे तो आप अपना drone  खुद से भी बना लेंगे क्योकि आज के समय में drone में लगने वाले electronics components आसानी से मिल जाते है

 Drone क्या होता है?

ड्रोन एक unmanned aerial vehicle (UAV) है, जिसे मानव रहित विमान प्रणाली (यूएएस) के रूप में भी जाना जाता है, जो human pilot के बिना एक विमान है। ड्रोन को आम तौर पर जमीन पर एक remote pilot के द्वारा controll किया जाता है, लेकिन कुछ ड्रोन pre-programmed flight path या GPS का उपयोग करके autonomously से उड़ सकते हैं।

Drone में use किये जाने वाले Parts:

Frame:  फ़्रेम ड्रोन की main structure है और अन्य सभी components को एक साथ रखता है। यह आम तौर पर हल्के और टिकाऊ सामग्री से बना होता है, जैसे carbon fiber या plastic


Motors: drone में high RPM वाली motors का use होता है जो सामान्यतः drones में लगभग 5,000 से 10,000 RPM की होती है 

Propellers: ड्रोन में लगे propellers lift और thrust generate करते है ये आम तौर पर प्लास्टिक या कार्बन फाइबर से बने होते हैं।


Electronic speed controllers (ESCs):   ESCs मोटरों की गति को नियंत्रित करते हैं। वे आम तौर पर बैटरी और मोटरों के बीच स्थित होते हैं।


Flight controller:  flight controller ड्रोन का "मस्तिष्क" है। यह ड्रोन की मोटरों को controlling करने और उसकी उड़ान को स्थिर करने के लिए जिम्मेदार है। जिससे drone के motors को controll किया जाता है 


Remote controller: pilot ड्रोन के flight controller को commands भेजने के लिए एक remote controller का उपयोग करता है। रिमोट कंट्रोलर में आमतौर पर दो joysticks होते हैं, एक ड्रोन की ऊंचाई और travel की दिशा को control करने के लिए, और दूसरा ड्रोन के rotation को control करने के लिए होता है ।


Transmitter/Receiver:  इसको short में Tx/Rx भी कहा जाता है  Transmitter Remote Controller ko Signal Transmitt करता है और रिसीवर रिमोट कंट्रोलर से Radio Signal  Receive करता है और उन्हें फ्लाइट कंट्रोलर को भेजता है।


Battery: बैटरी ड्रोन की मोटरों, ESCs और अन्य electronic components को power प्रदान करती है।  ये सामान्यतः lithium polymer (LiPo) battery होती है  


Camera: कई drones में एक कैमरा लगा होता है, जिसका उपयोग से तस्वीरें और वीडियो लेने के लिए किया जाता है।


Drone कैसे काम करता है ? 




ड्रोन को उड़ान भरने के लिए लिफ्ट की आवश्यकता होती है, जो उस पर लगे propellers द्वारा प्रदान की जाती है। propeller पर मोटर का RPM जितना अधिक होगा, लिफ्ट उतनी ही अधिक होगी।

जब ड्रोन चालू किया जाता है, तो propellers घूमने लगते हैं। ड्रोन को उठाने के लिए मोटरों का RPM बढ़ाया जाता है। जैसे ही आरपीएम बढ़ता है, ड्रोन जमीन से ऊपर उठ जाता है। ड्रोन को बाएँ या दाएँ घुमाने के लिए सामने के दो प्रोपेलर की गति बढ़ा दी जाती है, जिससे ड्रोन आगे बढ़ता है। ड्रोन को पीछे की ओर ले जाने के लिए पीछे के दो प्रोपेलर की गति कम कर दी जाती है।

जब रिमोट कंट्रोलर का उपयोग करके निर्देश दिए जाते हैं, तो रेडियो तरंगें उत्पन्न होती हैं और ड्रोन में स्थापित रिसीवर द्वारा प्राप्त की जाती हैं। इस सिग्नल को फिर डिजिटल सिग्नल में बदल दिया जाता है और फ्लाइट कंट्रोलर को भेज दिया जाता है, जो ड्रोन की उड़ान को नियंत्रित करता है। उड़ान नियंत्रक Electronic Speed Controllers (ESC) को नियंत्रण संकेत भेजता है, जो specified speed पर मोटरों को घुमाते हैं।



Application of drones: 

आज के समय में drones का उपयोग काफी क्षेत्रो में किया जा रहा है और इसकी demand भी बढ़ती जा रहे है कुछ मुख्य क्षेत्र है

Photography and videography: ड्रोन का उपयोग stunning aerial photos और videos लेने के लिए किया जाता  है। यह विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोगी है, जैसे videos, filmmaking और journalismइत्यादि 

Delivery: drone का इस्तेमाल food delivery companies कर रही है जो की अभी अपेक्षाकृत नया एप्लिकेशन है लेकिन आजकल के drone इस तरह के काम आसानी से कर लेते है।

Inspection and maintenance: ड्रोन का उपयोग bridges, power lines और infrastructure का निरीक्षण करने के लिए किया जा सकता है। पारंपरिक तरीकों की तुलना में इन संरचनाओं का निरीक्षण करने का यह अधिक सुरक्षित और अधिक कुशल तरीका है।

Search and rescue: ड्रोन का उपयोग खोए हुए लोगों और प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों की खोज के लिए किया जा सकता है। इनका उपयोग remote areas में लोगों तक आपूर्ति पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।

Agriculture: ड्रोन का उपयोग फसलों और पशुओं की निगरानी के लिए किया जा सकता है। इससे किसानों को problems कको तुरंत  identify करने और सुधारात्मक action करने में मदद मिल सकती है।



Conclusion: 

drones का उपयोग पहले से ही विभिन्न क्षेत्रो में किया जा रहा है और जैसे जैसे ड्रोन के तकनीक में development हो रहा है वैसे वैसे इसकी उपयोगिता भी बढ़ती जाएगी और इस फील्ड में संभावित career opportinity भी बढ़ रही है drone manufacturing से ले कर drone maintinence के फील्ड में तो अगर आप drone technology में intrest रखते है तो आप इसके लिए professional skills सिख कर इसमें आगे बढ़ सकते है 


दोस्तों उम्मीद करता हूँ ये पोस्ट आपको अच्छा लगा हो अगर आपके कोई भी सवाल हो तो आप हमारे टेलीग्राम और इंस्टाग्राम chanel लिखे मै पूरी कोशिश करूँगा answer देने का धन्यवाद् 

Comments

Popular posts from this blog

Power factor क्या होता है | power factor formula

Power factor क्या होता है | power factor formula इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई में, हम अक्सर पावर फैक्टर (Power Factor) शब्द सुनते हैं. यह विद्युत परिपथों (Electrical Circuits) की दक्षता (Efficiency) को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आइए, इस ब्लॉग पोस्ट में  पावर फैक्टर को सरल भाषा में समझते हैं और इसका सूत्र भी सीखते हैं. Power Factor क्या होता है ?   सरल शब्दों में, पावर फैक्टर किसी विद्युत परिपथ द्वारा खींची गई कुल विद्युत धारा (Current) के उस भाग का अनुपात है जो वास्तव में उपयोगी कार्य (Useful Work) करने में लगता है. इसे हम प्रतिशत (%) में व्यक्त करते हैं. उच्च पावर फैक्टर (High Power Factor): यह एक आदर्श स्थिति है, जहाँ अधिकांश धारा का उपयोग वास्तविक कार्य करने में होता है. इसे 90% से 100% के बीच माना जाता है. उच्च पावर फैक्टर दक्षता का सूचक है, जिसका मतलब है कि कम ऊर्जा बर्बाद होती है. निम्न पावर फैक्टर (Low Power Factor): इसका मतलब है कि धारा का एक बड़ा हिस्सा वास्तविक कार्य करने के बजाय परिपथ में रिएक्टिव पावर (Reactive Power) उत्पन्न करने में खर्च हो र...

अपनी तैयारी को मजबूत करें: इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग इंटरव्यू में पूछे जाने वाले 20 प्रश्न और उनके उत्तर

कुछ basic questions होते हैं जो इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स के छात्रों से इंटरव्यू में पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास हर छात्र को अवश्य करना चाहिए। सभी प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए हैं। (1) ट्रांसफार्मर के पीछे मूल सिद्धांत क्या है? (a) विद्युत चुंबकत्व  (b) रासायनिक प्रतिक्रिया (c) घर्षण (d) प्रकाश उत्सर्जन (2) विद्युत परिपथों के साथ काम करते समय हमेशा कौन सी सुरक्षा सावधानी बरतनी चाहिए? (a) केवल लंबे हैंडल वाले औजारों का उपयोग करें। (b) गीले हाथों से काम करें। (c) कभी भी बिजली स्रोत को बंद न करें। (d) हमेशा मान लें कि परिपथ चालू है।  (3) AC और DC धारा में क्या अंतर है? (a) AC धारा DC धारा से अधिक मजबूत होती है। (b) DC धारा दिशा बदलती है, जबकि AC धारा नहीं बदलती।  (c) AC धारा का उपयोग घरों में किया जाता है, जबकि DC धारा का उपयोग कारों में किया जाता है। (d) कोई अंतर नहीं है। (4) परिपथ में फ्यूज का क्या कार्य है? (a) धारा प्रवाह को बढ़ाना (b) परिपथ को अधिभार से बचाना  (c) वोल्टेज को नियंत्रित करना (d) संकेतों को बढ़ाना (5) ऑप-एम्प (ऑपरेशनल एम्पlifier) कि...

From Bits to Bytes: A Hierarchy of Data

दोस्तों,आज की डिजिटल दुनिया में हमारी सारी जानकारी डिजिटल रूप से संग्रहीत होती है। इस पोस्ट में हम समझेंगे कि डेटा के आकार को कैसे मापा जाता है।  बिट कंप्यूटर के सबसे छोटे डेटा प्रतीक हैं, जो केवल 0 या 1 में व्यक्त किए जा सकते हैं। 8 बिट का एक समूह एक बाइट कहलाता है, जो एक चर या अक्षर को दर्शाता है। डेटा आमतौर पर जानकारी का एक संग्रह होता है, जो विभिन्न स्रोतों से एकत्र किया जाता है, और फ़ाइल एक संगठित संग्रह है जिसका उपयोग कंप्यूटर पर किया जाता है। Main points: बिट डेटा का सबसे छोटा इकाई है। 8 बिट एक बाइट बनाते हैं। डेटा जानकारी का एक संग्रह है। फाइल एक संगठित डेटा संग्रह है। डिजिटल उपकरणों में बिट, बाइट और अन्य इकाइयों का उपयोग होता है। Data Size Hierarchy: A Quick Guide डिजिटल प्रौद्योगिकी के युग में, डेटा का महत्व बढ़ता जा रहा है। हम दैनिक जीवन में कई प्रकार के डेटा का उपयोग करते हैं, जैसे फोटो, वीडियो, फाइलें और जानकारी। इन डेटा प्रकारों को मापने के लिए विभिन्न इकाइयों का उपयोग किया जाता है। डेटा इकाइयों के महत्व को समझना डेटा प्रबंधन और मेमोरी अनुक्रमण में बिट, बाइट, किलोबाइट...